इंसान
तूफानों ने पर तोड़े है बहुत, पर गगन छूने के अरमान कहाँ टूटे है? मुकमल जिस्म बचे ना बचे, ख्वाबों में बसे जहान कहाँ टूटे है? जो कहते इतिहास गवाह है, सभयताएँ विनष्ट हो जाती हैं। आज कोई ये बतला दो इस दुनिया में इंसान कहाँ टूटे हैं? -------- उद्देश्य मिश्रा