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Showing posts from May, 2019

सृष्टि सिद्धान्त

सूर्योदय तो सूर्यास्त निश्चित, अगर पूर्व बना, पाश्चात्य निश्चित। साक्ष्य है इतिहास वर्तमान का, लुप्त होना विद्यमान का। परिवर्तित विज्ञान निश्चित, परिवर्तित संज्ञान निश्चित निश्चति बदलना ईमान का विधि और विधान का। परिवर्तित इतिहास निश्चित, परिवर्तित विश्वास निश्चित। निश्चित बदलना भूगोल का, ऐतिहासिक खगोल का। विष्मरण सम्मान निश्चित, विष्मरण अपमान निश्चित। निश्चित भूलना विचार का नीतिसंगत अचार का। -------------------------------- उद्देश्य मिश्रा संज्ञान- awareness ,ईमान- religion , विद्यमान- existing विधि- fate, विश्वास- mythology, नीतिसंगत- moral

तुम सर्जक बनो

तुम सर्जक बनो, लगो स्वप्न सृजन में। वो चरित्रहीन हैं,जो स्वप्न मारते। हर सहर सम्पूर्ण होते, मुस्कुराते, काम पर चले जाते, परंतु शाम की मद्धम रोशनी में, खंडित हो घर आते। आराम फ...