समय
शपथ समय का है परिवर्तन क्षीर, सरस्वती या तेरा मन । मेघ जो जाता हिन्द मुकुट पर बन जल होता समय पर अर्पण । सुंदरबन के घने वनो में या कछ में पेड़ के सूखे तनो में । समय है बसता समय है रचता कोलाहल हो या हो सूनापन । किसी का जीवन एक सा ना रहता महारानी हो या हो बंजरान। समय है आता खिलखिलाता फिर बह जाता अश्रु बन बन । समय समय पर समय बदलता हर पल लेता रूप है नूतन । समय कवी है समय है श्रोता कहो वाल्मीकि या नंदन पंत । ------------------------------ उद्देश्य मिश्रा