समय

शपथ समय का है  परिवर्तन
क्षीर, सरस्वती  या  तेरा  मन ।
मेघ जो जाता हिन्द मुकुट पर
बन जल होता समय पर अर्पण ।

सुंदरबन के घने वनो में
या कछ में  पेड़  के सूखे  तनो  में ।
समय  है  बसता  समय  है  रचता
कोलाहल  हो  या  हो  सूनापन ।

किसी का जीवन एक सा ना रहता
महारानी  हो या  हो  बंजरान।
समय  है  आता  खिलखिलाता
फिर  बह  जाता  अश्रु  बन  बन ।

समय  समय  पर  समय  बदलता
हर  पल  लेता  रूप  है  नूतन ।
समय  कवी  है  समय  है  श्रोता
कहो  वाल्मीकि  या  नंदन  पंत ।

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उद्देश्य मिश्रा 

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