ज्ञानी लोग
उसूल जो बना रहा तू अपने जीने के,
कल का बेहूदा है तू, ये शर्त लगा ले।
पोथियाँ पढ़, कुछ तमीज सीख,
अपने अरमानो पर एक सुखी परत लगा ले।
कल का बेहूदा है तू, ये शर्त लगा ले।
पोथियाँ पढ़, कुछ तमीज सीख,
अपने अरमानो पर एक सुखी परत लगा ले।
जो जाता है उनकी गलियों में कभी भी,
आँखें बंद रखना , भरोसा उठ जाता है।
जूठन जो मिले ज्ञान का कही , खा लेना
हर ज्ञानी वहा वही खाता है।
आज़ाद परिंदो का जाना मना है उधर,
वो कहते है आवारा कुछ न सीख पाता है।
मचलता है इधर ,उधर मड़राता है,
आवारापन ज्ञान को उनके खा जाता है।
वो कहते है आवारा कुछ न सीख पाता है।
मचलता है इधर ,उधर मड़राता है,
आवारापन ज्ञान को उनके खा जाता है।
वो आवारा था, अब बेहूदा है,
लड़े क्यों, बदनामी कबूल कर ली।
नजरो में उनकी गिरा है, पर हर्षित है,
जिसने ये छोटी सी भूल कर ली।
लड़े क्यों, बदनामी कबूल कर ली।
नजरो में उनकी गिरा है, पर हर्षित है,
जिसने ये छोटी सी भूल कर ली।
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उद्देश्य मिश्रा
हर्षित- Joyful
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