मैं कौन हूँ
मैं धर्म हूँ अधर्म हूँ
पाखंडी और विनम्र हूँ
मैं अगुण हूँ मैं सगुण हूँ
या फिर मैं निर्गुण हूँ।
पाखंडी और विनम्र हूँ
मैं अगुण हूँ मैं सगुण हूँ
या फिर मैं निर्गुण हूँ।
मैं दृश्य हूँ अदृश्य हूँ
मैं भूत और भविष्य हूँ,
मैं आदि हूँ मैं अंत हूँ
या फिर अनंत हूँ।
मैं भूत और भविष्य हूँ,
मैं आदि हूँ मैं अंत हूँ
या फिर अनंत हूँ।
मैं मंत्र हूँ विलाप हूँ
वरदान हूँ और श्राप हूँ,
जो चाहो वो तुम मान लो
मैं कलह हूँ और जाप हूँ ।
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उद्देश्य मिश्रा
वरदान हूँ और श्राप हूँ,
जो चाहो वो तुम मान लो
मैं कलह हूँ और जाप हूँ ।
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उद्देश्य मिश्रा
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