हर पहर जल गया
गालियों में हंगामा था
हमने तमाशा देखा ,
तमाशे में जाने कैसे
हमारा घर जल गया ।
कलम कश्मकश में थी
कुछ लब्ज़ आये तो हालात बदले,
कश्मकश बानी रही
और सारा शहर जल गया ।
सोचा शाम जली तो क्या
कल सुबह फिर आएगी ,
इसी इंतजार में बैठे थे
की हर पहर जल गया।
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उद्देश्य मिश्रा
हमने तमाशा देखा ,
तमाशे में जाने कैसे
हमारा घर जल गया ।
कलम कश्मकश में थी
कुछ लब्ज़ आये तो हालात बदले,
कश्मकश बानी रही
और सारा शहर जल गया ।
सोचा शाम जली तो क्या
कल सुबह फिर आएगी ,
इसी इंतजार में बैठे थे
की हर पहर जल गया।
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उद्देश्य मिश्रा
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