मुस्कुरा

कल  खोया  कल  पाएगा ,
होगा  तेरा  जो  है  होना।
रोशन  जहा  फिर  हो  जायेगा ,
अँधेरे  में  काहे  विचलित  होना। 

चल  उठ  देख  जरा  मन ,
बचे  अरमान  कुछ  और  भी  हैं।
ये  सोच  मत  उन्हें  संजोयेगा  कैसे ,
तेरे  तरकश  में  कमान  और  भी  हैं ।

तू  नहीं  टुटा,  बस  सपने  टूटे,  
सपनो  के  जहान और  भी  हैं। 
कुटी  से  निकले  कदम  तो  देखो 
दुनिया  में  मकान  और  भी  हैं ।

रोने  दे  उनको , चाहते  हैं  जो 
वास्ते  उसके   इंसान  और  भी  हैं।
क्यू  सिथिल  और  यु  शांत  है  तू ?
तेरे  अम्बर  में  निशान  और  भी हैं।
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उद्देश्य मिश्रा 

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