अतीत
आज खोला अतीत के पन्नो को
रेत की चादर पर एक बस्ती थी मेरी ,
समंदर के नीलम में तैरती वो कश्ती थी मेरी ,
लहरों में खेलती वो मस्ती थी मेरी |
तूफानों ने घेरा उस सागर में कश्ती को ,
वरना साहिल पर तो कुछ हस्ती थी मेरी|
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उद्देश्य मिश्रा
रेत की चादर पर एक बस्ती थी मेरी ,
समंदर के नीलम में तैरती वो कश्ती थी मेरी ,
लहरों में खेलती वो मस्ती थी मेरी |
तूफानों ने घेरा उस सागर में कश्ती को ,
वरना साहिल पर तो कुछ हस्ती थी मेरी|
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उद्देश्य मिश्रा
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