आदिकाल से अंत शुरू है।
किलकारी सा शंखनाद दे,
जीवन का संग्राम शुरू है।
उस छण से ही ढाल शुरू है,
जिस छण से सोपान शुरू है।
अन्त शुरू हर अभिमानी का,
जब से वितरण ज्ञान शुरू है।
शुरू है अंत हर ज्ञानी का,
जिस छण से अभिमान शुरू है।
प्रमाण वीरता शौर्य से शुरू तो,
परिणाम से रंज शुरू है।
गंतव्य का पंथ शुरू है,
आदि काल से अंत शुरू है।
-----------------------------------
उद्देश्य मिश्रा
Comments
Post a Comment