स्वयं

हुल्लड़ में, कटी पतंग सा हूँ,
सतत धारा में, टूटी तरंग सा हूँ।
अधूरा मैं, हैं अधूरी रचनाएं मेरी,
संकलन में विचारो के, थोड़ा तंग सा हूँ।
-----------------------------------------------
उद्देश्य मिश्रा

Comments