यायावर


यायावरी मेरी विरासत है,

यायावर मुुझको बनना होगा।


जेष्ठ दोपहरी  भीग गए तो ,

सावन  में फिर जलना होगा।

प्रकृति है जो रहे संतुलित,

संतुलन में पलना होगा ।


पंख लगे तो उड़ जाता मैं,

चक्र लगे तो दौड़ता रहता।

प्रबल पाव तो कदम चलेंगे,

या रेंग रेंग कर चलना होगा।


यायावरी मेरी विरासत है,

यायावर मुुझको बनना होगा।


जड़ होना जो नियति होती,

जड़ का जीवन मैं पाता।

पुलकित होता अचल ही रहता,

अचल भाव में झर जाता।


भांति भांति की ऋतू जो आती,

रंग देख कर इठलाता।

जो ऋतू ना बदली सही समय पर,

आश्रित होता, बस बिलखाता।


चल जीवन है, चपल हो शैली,

आरोहण हो या ढलना होगा।

यायावरी मेरी विरासत है,

यायावर मुुझको बनना होगा।


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उद्देश्य मिश्र


नियति- destiny, चल- moving, चपल- Agile, आरोहण- ascend

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