तुम बस यूँ ही हसती जाना
कभी जो ख़ामोशी हमारी,
मोहब्बत हुआ करती थी,
अब इस कदर समायी मुझमे
की बस मज़बूरी बनगयी है ।
खुद से मिलने की खातिर,
दूर रहते थे तुझसे,
अब तो खुद से ही कुछ
दुरी बढ़ गयी है ।
तुम कहते हो कुछ तो बोलो,
हम बोले भी तो क्या ?
समय था वो कुछ और,
जब ख़यालात आया करते थे ।
है ये समय की अभिपुष्टि,
या किसी की कमी सी है ,
जो अधरों पर शब्द नहीं ,
आँखों में नमी सी है
अभी राहें कुछ ऊसर हैं,
न ही हैं हम अब दीवाने,
राहे फिर जब खिल जाएँगी ,
निकालेंगे वो शेर पुराने ।
कहीं पूरब में दूर पवन पर ,
हम बैठेंगे शायर बन कर ,
फिर न ये वक़्त याद दिलाना
तुम बस यूँ ही हसती जाना .....
तुम बस यूँ ही हसती जाना.....
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उद्देश्य मिश्रा
मोहब्बत हुआ करती थी,
अब इस कदर समायी मुझमे
की बस मज़बूरी बनगयी है ।
खुद से मिलने की खातिर,
दूर रहते थे तुझसे,
अब तो खुद से ही कुछ
दुरी बढ़ गयी है ।
तुम कहते हो कुछ तो बोलो,
हम बोले भी तो क्या ?
समय था वो कुछ और,
जब ख़यालात आया करते थे ।
है ये समय की अभिपुष्टि,
या किसी की कमी सी है ,
जो अधरों पर शब्द नहीं ,
आँखों में नमी सी है
अभी राहें कुछ ऊसर हैं,
न ही हैं हम अब दीवाने,
राहे फिर जब खिल जाएँगी ,
निकालेंगे वो शेर पुराने ।
कहीं पूरब में दूर पवन पर ,
हम बैठेंगे शायर बन कर ,
फिर न ये वक़्त याद दिलाना
तुम बस यूँ ही हसती जाना .....
तुम बस यूँ ही हसती जाना.....
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उद्देश्य मिश्रा
Greetings from the UK.
ReplyDeleteThank you. Love love, Andrew. Bye.